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वेद भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा हैं। इन्हें अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) माना गया है। वेद चार हैं—
वेद भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा हैं। इन्हें अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) माना गया है। वेद चार हैं— ऋग्वेद – देवताओं की स्तुतियाँ सामवेद – गान व संगीतात्मक उपासना यजुर्वेद – यज्ञ व कर्मकाण्ड अथर्ववेद – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक विषय 2. वेद के आंतरिक भाग (वेदांगिक संरचना) हर वेद चार भागों में समझा जाता है— संहिता – मंत्र ब्राह्मण – यज्ञ-विधि व अर्थ आरण्यक – साधना, उपनिषद – ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष का तत्त्वज्ञान सूत्रात्मक भाव : कर्म → उपासना → ज्ञान 3. वेद के आगे का

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20251 मिनट पठन


वाल्मिकी जी ने रामायण जैसा महाकाव्य लिख दिया ।इसमें 24000 हजार श्लोक है। जिसका पहला श्लोक गायत्री मंत्र से शुरू होता है।
वियोगी होगा पहला कवि आह से उपजा होगा पहला गान निकलकर आंखों से चुपचाप बही होगी कविता अन जान पहली कविता तो आह से पैदा हुई होगी। और कविता में रसों का होना अनिवार्य है। भरत मुनि ने 9 रस बताए है, अपने नाट्यशास्त्र में । वाल्मीकि जी ने रामायण में पहला श्लोक अनुष्टुप् छन्द में बोला। जो प्रथम करुण रस में था। निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः । यत्क्रौंचमिथुनादेकम् अवधी: काममोहितम् ।। अर्थ- हे दुष्ट, तुमने प्रेम मे मग्न क्रौंच पक्षी को मारा है। जा तुझे कभी भी प्रतिष्ठा की प्राप

संस्कृत का उदय
9 नव॰ 20251 मिनट पठन


दर्शन: आत्मज्ञान का मार्ग -Dr.Upendar
दर्शन: आत्मज्ञान का मार्ग प्रस्तावना दर्शन (Darshan) केवल आँखों से देखना नहीं, बल्कि गहरे आत्मबोध और सत्य को समझने की प्रक्रिया है। यह आत्मा, ब्रह्मांड और परम सत्य के रहस्यों को उजागर करने का साधन है। यह पुस्तक दर्शन के विभिन्न स्वरूपों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है, जिससे हर कोई इसका लाभ उठा सके। अध्याय 1: दर्शन की परिभाषा संस्कृत में "दर्शन" शब्द "दृश्" धातु से बना है, जिसका अर्थ "देखना" होता है। परंतु दर्शन केवल इंद्रियों से देखने तक सीमित नहीं, बल्कि यह विचारों, तर्क औ

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20254 मिनट पठन


नमो नमः
नमो नमः एक भारत, महान भारत, अनेक परंपराएँ। एक भारत — श्रेष्ठ भारत,विविध परंपराओं से सुसज्जित भारत। एक भारत - उदात्त भारत,अनेक परंपराओं का संगम।

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20251 मिनट पठन


कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत
कौटिल्य का सप्तांग सिद्धांत कौटिल्य (चाणक्य) को भारतीय राजनीतिक चिन्तन का जनक माना जाता है। उन्होंने विश्व-प्रसिद्ध ग्रन्थ “अर्थशास्त्र” की रचना की। उनकी शिक्षा-दीक्षा तक्षशिला विश्वविद्यालय में हुई तथा वे वहाँ आचार्य भी रहे। नन्द राजा द्वारा अपमानित किए जाने पर उन्होंने नन्द वंश के नाश की प्रतिज्ञा ली और चन्द्रगुप्त मौर्य को प्रशिक्षित कर मौर्य साम्राज्य की स्थापना कराई। कौटिल्य ने सर्वप्रथम व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक राज्य व्यवस्था का सिद्धांत दिया, जिसे सप्तांग सिद्धांत

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20252 मिनट पठन


पुराण साहित्य में विज्ञान-
पुराण साहित्य को प्रायः केवल धार्मिक एवं पौराणिक कथाओं तक सीमित मान लिया जाता है, जबकि वस्तुतः यह भारतीय ज्ञान–परंपरा का एक बहुआयामी, वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक भंडार है। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य पुराण साहित्य में निहित विविध विज्ञानों—जैसे आयुर्विज्ञान (आयुर्वेद), रत्न विज्ञान, वास्तु विज्ञान, ज्योतिष विज्ञान, सामुद्रिक विज्ञान, पशु विज्ञान,तथा धनुर्विज्ञान—का अनुसन्धानात्मक सर्वेक्षण प्रस्तुत करना है। अग्निपुराण, गरुड़पुराण, मत्स्यपुराण, नारदपुराण एवं विष्णुधर्मोत्तरपुराण

संस्कृत का उदय
23 दिस॰ 20254 मिनट पठन


निर्गुणमानसपूजा
एक ऐसी पूजा विधि है जिसमें बिना किसी भौतिक वस्तु या सामग्री के, मन ही मन या कल्पना में भगवान की पूजा की जाती है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित निर्गुणमानसपूजा शिष्य उवाच अखण्डे सच्चिदानन्दे निर्विकल्पैकरूपिणि । स्थितेऽद्वितीयभावेऽपि कथं पूजा विधीयते ॥ 1 पूर्णस्यावाहनं कुत्र सर्वाधारस्य चासनम् । स्वच्छस्य पाद्यमर्घ्यं च शुद्धस्याचमनं कुतः ॥ 2 निर्मलस्य कुतः स्नानं वासो विश्वोदरस्य च । अगोत्रस्य त्ववर्णस्य कुतस्तस्योपवीतकम् ॥ 3 निर्लेपस्य कुतो गन्धः पुष्पं निर्वासनस्य च । निर्विशे

संस्कृत का उदय
21 दिस॰ 20252 मिनट पठन


आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशीपंचकम्
आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशीपंचकम् मनोनिवृत्ति: परमोपशान्ति: सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च। ज्ञानप्रवाहा विमलादिगंगा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।1 यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्। सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।2 कोशेषु पञ्चस्वधिराजमाना बुद्धिर्भवानी प्रतिदेहगेहम्। साक्षी शिव: सर्वगतोSन्तरात्मा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।3 काश्या हि काशते काशी काशी सर्वप्रकाशिका। सा काशी विदिता येन तेन प्राप्ता हि काशिका।।4 काशीक्षेत्रं शरीरं त्रिभुवनजननी व्

संस्कृत का उदय
21 दिस॰ 20251 मिनट पठन


आदि शंकराचार्य द्वारा रचित सुवर्णमालास्तुति
सुवर्णमालास्तुति अथ कथमपि मद्रासनां त्वद्गुणलेशैर्विशोधयामि विभो । साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ 1 ॥ आखण्डलमदखण्डनपण्डित तण्डुप्रिय चण्डीश विभो । साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ 2 ॥ इभचर्माम्बर शम्बररिपुवपुरपहरणोज्ज्वलनयन विभो । साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ 3 ॥ ईश गिरीश नरेश परेश महेश बिलेशयभूषण भो । साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम् ॥ 4 ॥ उमया दिव्यसुमङ्गलविग्रहयालिङ्गितवामाङ्ग विभो । साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं

संस्कृत का उदय
21 दिस॰ 20254 मिनट पठन
The Life and Legacy of Adi Shankara: A Journey Through Indian Philosophy
Indian philosophy has been shaped by many great thinkers, but few have left a mark as profound as Adi Shankara. His teachings continue to influence spiritual thought and practice across India and beyond. Understanding his life and work offers insight into the foundations of Advaita Vedanta, a school of philosophy that emphasizes the unity of the self and the ultimate reality. Early Life and Background Adi Shankara was born in the early 8th century in Kalady, a village in pres

संस्कृत का उदय
21 दिस॰ 20253 मिनट पठन
The Legacy of Ramaunjacharya: Exploring His Impact on Philosophy and Culture
Ramaunjacharya stands as a towering figure in the history of Indian philosophy and culture. His teachings and writings have shaped religious thought and cultural practices for centuries. Understanding his legacy offers insight into how his ideas continue to influence spiritual and social life today. Who Was Ramaunjacharya? Ramaunjacharya was a philosopher and theologian who lived in the 11th and 12th centuries. He is best known for founding the Vishishtadvaita school of Vedan

संस्कृत का उदय
21 दिस॰ 20253 मिनट पठन


योग क्रिया में सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, स्वयं के निकट हो जाना। उसे ही समाधि की प्रथम अवस्था कहते है।
योग क्रिया में सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, स्वयं के निकट हो जाना। उसे ही समाधि की प्रथम अवस्था कहते है। #yogkiya

संस्कृत का उदय
13 नव॰ 20251 मिनट पठन


गीता जीधर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
जब व्यक्ति किसी भी मोह दौलत,शोहरत, पद, प्रतिष्ठा मान सम्मान में अंधा हो जाता है। तो उसका भी हाल धृतराष्ट्र की तरह होता है। गीता जी धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय।।1.1। यहां मामकाः शब्द यह मोह रूप है, कि जब व्यक्ति केवल अपने बारे में ही सोचता है। तो वह अच्छाई और बुराई सब भूल जाता है। वो किसी भी तरह के गलत कार्य करने में लग जाता है। इसलिए भगवान श्री कृष्ण गीता में कर्म, अकर्म, और विकर्म की बात बताते है। और कहते है, निष्काम भावना

संस्कृत का उदय
9 नव॰ 20251 मिनट पठन


भक्ति का स्वाद इतना ज्यादा है। कि वो बता पाना असम्भव है।
भक्ति का स्वाद इतना ज्यादा है। कि वो बता पाना असम्भव है। भगवान वेदव्यास रचित महान ग्रंथ श्रीमद्भागवत पुराण जिसका रसास्वादन जनता द्वापरयुग के अंत से आज तक कर रही है। जिसमें सृष्टि के रहस्य को बड़े ही मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया है। इसमें भगवान श्री कृष्ण की लीला और जिस विषय को बड़े बड़े महान बुद्धिमान आज भी समझ नहीं पाते। उस जीवन के सार का बड़े ही सहजता से समझाया है। स तरति स तरति, स लोकान्स्तरयति। वह सचमुच इस माया को पार कर जाता है, तथा संसार को भी इससे पार ले जाता है। अनिर

संस्कृत का उदय
9 नव॰ 20251 मिनट पठन
एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं ।
संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत संगम। भारत, एक ऐसा देश जो विविधता में एकता का जीता-जागता उदाहरण है। यह भूमि न केवल भौगोलिक दृष्टि...

संस्कृत का उदय
29 जुल॰ 20254 मिनट पठन
संस्कृत भाषा भारत की सांस्कृतिक, धार्मिक, और साहित्यिक जीवन की मूल भाषा है, संस्कृत का उदय वैदिक काल से प्रारंभ होकर समय के साथ व्यापक विकास हुआ।
संस्कृत सनातन धर्म की प्राचीन पवित्र भाषा है, जिसका उपयोग वेदों, जैन बौद्ध एवं ग्रंथों में होता आया है। विद्वानों के अनुसार ऋग्वेद...

संस्कृत का उदय
3 जुल॰ 20251 मिनट पठन
विचार चाणक्य ने सबसे पहले प्रस्तुत किया।
राष्ट्रवाद का पहला बीज न पड़ता “एक राष्ट्र – एक नीति – एक शासक” यह विचार चाणक्य ने सबसे पहले प्रस्तुत किया। उन्होंने ही बताया कि भारत...

संस्कृत का उदय
13 मई 20251 मिनट पठन
सबसे बड़ा दान
सबसे बड़ा दान- सनातन धर्म में अन्न को 'ब्रह्म' भी कहा गया है और अन्नदान को सबसे बड़ा दान माना गया है दान का अर्थ है किसी को सहायता या...

संस्कृत का उदय
11 मई 20251 मिनट पठन
भक्ति का स्वाद इतना ज्यादा है। कि वो बता पाना असम्भव है।
भगवान वेदव्यास रचित महान ग्रंथ श्रीमद्भागवत पुराण जिसका रसास्वादन जनता द्वापरयुग के अंत से आज तक कर रही है। जिसमें सृष्टि के रहस्य को...

संस्कृत का उदय
11 मई 20251 मिनट पठन
संस्कृत में अपना परिचय कैसे दें ?
संस्कृत में अपना परिचय देने के लिए, आप कह सकते हैं: "मम नाम (आपका नाम) अस्ति।" इसके बाद, आप अपना परिचय देना जारी रख सकते हैं, जैसे: "अहं...

संस्कृत का उदय
6 मई 20251 मिनट पठन
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