दिल्ली का सबसे प्राचीन और प्रमुख पुराना नाम इंद्रप्रस्थ है,
- संस्कृत का उदय

- 15 फ़र॰
- 2 मिनट पठन
संस्कृत श्लोक (महाभारत संदर्भ)

"खाण्डवप्रस्थमासाद्य पाण्डवा राजसत्तमाः। तत्र चक्रुः पुरीं रम्यां इन्द्रप्रस्थं मनोहराम्॥"
अर्थ: पांडवों ने खांडवप्रस्थ पहुंचकर वहाँ एक रमणीय और मनोहर नगरी बसाई,
जिसका नाम इन्द्रप्रस्थ रखा।
इन्द्रप्रस्थ का अर्थ
“इन्द्रप्रस्थ” शब्द दो भागों से मिलकर बना है:
इन्द्र = देवताओं के राजा
प्रस्थ = स्थान / नगर
अर्थात — “इन्द्र के समान भव्य नगर”।

1. इन्द्रप्रस्थ की स्थापना
इन्द्रप्रस्थ की स्थापना से पहले यह क्षेत्र खांडव वन कहलाता था।
जब कौरवों और पांडवों के बीच राज्य विभाजन हुआ, तब पांडवों को खांडवप्रस्थ नामक एक उजाड़ भूमि मिली।
अर्जुन और श्रीकृष्ण ने अग्नि देव की सहायता के लिए खांडव वन का दहन किया था। भगवान श्रीकृष्ण की सहायता से पांडवों ने उस बंजर भूमि को एक भव्य नगर में बदल दिया, जिसे इन्द्रप्रस्थ कहा गया।
2. मयसभा और वैभव
इन्द्रप्रस्थ की सबसे प्रसिद्ध विशेषता थी उसकी सभा, जिसे मय दानव ने बनाया था। इसे “मयसभा” कहा जाता है।
यह सभा इतनी अद्भुत थी कि उसमें जल और भूमि का भ्रम होता था। जब दुर्योधन वहाँ आया, तो वह भ्रमित होकर जल को भूमि समझ बैठा और उपहास का पात्र बना।

3. राजसूय यज्ञ
इन्द्रप्रस्थ में धर्मराज युधिष्ठिर ने राजसूय यज्ञ किया। उसी सभा में शिशुपाल का वध श्रीकृष्ण द्वारा किया गया था।
संस्कृत श्लोक
"राजसूयं महायज्ञं चकार भरतर्षभः।"

अर्थ: भरतवंश के श्रेष्ठ युधिष्ठिर ने महान राजसूय यज्ञ का आयोजन किया। यह यज्ञ इन्द्रप्रस्थ की समृद्धि और शक्ति का प्रतीक था।
अर्जुन का वनवास (इन्द्रप्रस्थ से प्रस्थान)
जब अर्जुन ने अनजाने में नियम भंग किया, तो उन्होंने स्वयं 12 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। यह घटना इन्द्रप्रस्थ में ही हुई थी।
`समापन श्लोक
"यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानम् अधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥"
(संदर्भ: भगवद्गीता)
दिल्ली का सबसे प्राचीन और प्रमुख पुराना नाम इंद्रप्रस्थ है,



टिप्पणियां