वेद भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा हैं। इन्हें अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) माना गया है। वेद चार हैं—
- संस्कृत का उदय

- 25 दिस॰ 2025
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ऋग्वेद – देवताओं की स्तुतियाँ
सामवेद – गान व संगीतात्मक उपासना
यजुर्वेद – यज्ञ व कर्मकाण्ड
अथर्ववेद – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक विषय
2. वेद के आंतरिक भाग (वेदांगिक संरचना)
हर वेद चार भागों में समझा जाता है—
संहिता – मंत्र
ब्राह्मण – यज्ञ-विधि व अर्थ
आरण्यक – साधना,
उपनिषद – ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष का तत्त्वज्ञान
सूत्रात्मक भाव: कर्म → उपासना → ज्ञान
3. वेद के आगे का ज्ञान (उत्तरवैदिक साहित्य)
(क) उपनिषद (ज्ञानकाण्ड)
आत्मा = ब्रह्म का साक्षात्कार
अद्वैत, विशिष्टाद्वैत, द्वैत आदि दर्शन की नींव
सूक्ति:
अहं ब्रह्मास्मि। तत्त्वमसि।
(ख) वेदांग (वेद को समझने के सहायक)
शिक्षा (उच्चारण)
कल्प (यज्ञ-विधि)
व्याकरण
निरुक्त
छन्द
ज्योतिष
(ग) स्मृति साहित्य
मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति धर्म, समाज व आचार-व्यवस्था
(घ) महाकाव्य
रामायण – आदर्श जीवन
महाभारत – कर्म, धर्म व गीता का ज्ञान
गीता-सार:
कर्मण्येवाधिकारस्ते…
(ङ) पुराण
ब्रह्माण्ड, सृष्टि, अवतार, भक्ति
18 महापुराण (भागवत, विष्णु, शिव आदि)
(च) दर्शन-शास्त्र (षड्दर्शन)
सांख्य, योग, न्याय, वैशेषिक, मीमांसा, वेदान्त
4. सार-सूत्र (One-line map)
वेद → ब्राह्मण → आरण्यक → उपनिषद → दर्शन → गीता/पुराण → जीवन-दर्शन




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