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संस्कृत गीत-Sanskrit Songs
संस्कृत गीत वन्दे मातरम् सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम् शस्य-श्यामलाम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ १॥ शुभ्र-ज्योत्सनां पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् सुहासिनीम् सुमधुर-भाषिणीम्। सुखदाम् वरदाम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ २॥ कोटि-कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केनो माँ एतो बोले बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ ३॥ तुमि विद्या तुमि धर्म तुमि हृदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणा: शरीरे बाहु ते तुमि मां शक्ति हृदये तुमि म

संस्कृत का उदय
24 जन॰2 मिनट पठन


वेद: भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा
वेद भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा हैं। इन्हें अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) माना गया है। वेद चार हैं— ऋग्वेद – देवताओं की स्तुतियाँ सामवेद – गान व संगीतात्मक उपासना यजुर्वेद – यज्ञ व कर्मकाण्ड अथर्ववेद – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक विषय वेद के आंतरिक भाग (वेदांगिक संरचना) हर वेद चार भागों में समझा जाता है— संहिता – मंत्र ब्राह्मण – यज्ञ-विधि व अर्थ आरण्यक – साधना उपनिषद – ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष का तत्त्वज्ञान सूत्रात्मक भाव : कर्म → उपासना → ज्ञान वेद के आगे का ज्ञान (उत

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20252 मिनट पठन
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