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महापुराण के नाम और उनका महत्त्व-महापुराण के नाम याद एक श्लोक
महापुराण के नाम और उनका महत्त्व-महापुराण के नाम याद एक श्लोक के माध्यम से हो जाएंगे।मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम् ।अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते ॥ १८ महापुराण के नाम और उनका महत्त्व- महापुराण के नाम याद एक श्लोक के माध्यम से हो जाएंगे। मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम् । अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते ॥ म-2, भ-2, ब्र-3, व-4 । अ-1,ना-1, प-1, लिं-1, ग-1, कू-1, स्क-1 ॥ विष्णु पुराण के अनुसार उनके नाम ये हैं—विष्णु, पद्म, ब्रह्म, वायु(शिव), भागवत,

संस्कृत का उदय
6 दिन पहले12 मिनट पठन
क्या संस्कृत केवल एक विषय है?
क्या संस्कृत केवल एक विषय है?

संस्कृत का उदय
9 जुल॰1 मिनट पठन
क्या संस्कृत आज भी आवश्यक है?
संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि जीवन-मूल्यों की भाषा है।

संस्कृत का उदय
9 जुल॰1 मिनट पठन


आख्यान एवं उपाख्यान : परिभाषा, स्वरूप और विकास-Aakhyaan and Upakhyaan: Definition, Nature, and Development”
1. आख्यान का अर्थ एवं परिभाषा आख्यान शब्द का प्रयोग प्राचीन काल से ही कथा या वृत्तांत के अर्थ में होता रहा है। व्युत्पत्ति – “आख्यायते अनेनेति आख्यानम्” अर्थात् जिसके द्वारा कहा जाए, वह आख्यान है। साहित्यदर्पण के अनुसार – “आख्यानं पूर्ववृतोक्ति” अर्थात् पूर्व में घटित घटना का कथन। मूल अर्थ – कथा, वृत्तांत, घटनाओं का विवरण। प्रकृति – वृत्तांतप्रधान (Narrative-based)। 2. उपाख्यान का अर्थ ‘उपाख्यान’ = उप + आख्यान अर्थात् किसी बड़ी कथा के भीतर समाहित छोटी कथा। महाभारत जैसे ग्

संस्कृत का उदय
31 मार्च3 मिनट पठन


संस्कृत गीत-Sanskrit Songs
संस्कृत गीत वन्दे मातरम् सुजलाम् सुफलाम् मलयज शीतलाम् शस्य-श्यामलाम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ १॥ शुभ्र-ज्योत्सनां पुलकित यामिनीम् फुल्ल कुसुमित द्रुमदल शोभिनीम् सुहासिनीम् सुमधुर-भाषिणीम्। सुखदाम् वरदाम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ २॥ कोटि-कोटि कंठ कल-कल निनाद कराले कोटि-कोटि भुजैर्धृत खरकरवाले, अबला केनो माँ एतो बोले बहुबल धारिणीम् नमामि तारिणीम् रिपुदलवारिणीम् मातरम्॥ वन्दे मातरम्॥ ३॥ तुमि विद्या तुमि धर्म तुमि हृदि तुमि मर्म त्वं हि प्राणा: शरीरे बाहु ते तुमि मां शक्ति हृदये तुमि म

संस्कृत का उदय
24 जन॰2 मिनट पठन


वेद: भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा
वेद भारत की प्राचीनतम ज्ञान-परंपरा हैं। इन्हें अपौरुषेय (मानव-रचित नहीं) माना गया है। वेद चार हैं— ऋग्वेद – देवताओं की स्तुतियाँ सामवेद – गान व संगीतात्मक उपासना यजुर्वेद – यज्ञ व कर्मकाण्ड अथर्ववेद – सामाजिक, मनोवैज्ञानिक व लौकिक विषय वेद के आंतरिक भाग (वेदांगिक संरचना) हर वेद चार भागों में समझा जाता है— संहिता – मंत्र ब्राह्मण – यज्ञ-विधि व अर्थ आरण्यक – साधना उपनिषद – ब्रह्म, आत्मा, मोक्ष का तत्त्वज्ञान सूत्रात्मक भाव: कर्म → उपासना → ज्ञान वेद के आगे का ज्ञान (उत्तरवैदिक

संस्कृत का उदय
25 दिस॰ 20252 मिनट पठन


गुरु शिष्य परंपरा
परंपराया: समर्थनं कुरु, विनाशं वारयितुम् ।। ।। परंपरा को बढ़ावा दें, पतन को रोकें।। गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥ भारतीय संस्कृति में अनेक परंपरा है, और उसमें एक परंपरा गुरु शिष्य परंपरा भी है। हर किसी के जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक होता है। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होना और हर पथ पर वो हमारा मार्गदर्शन करते रहते है। ये बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है। #जुड़े_अपनी_संस्कृति_से #हमारी_परंपरा_हमारी_विरास

संस्कृत का उदय
9 नव॰ 20251 मिनट पठन
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