top of page

शिक्षा वह बीज है, जो व्यक्ति में समझ के भाव को अंकुरित कर उसके




ये परीक्षा नही है, धैर्य और आत्मविश्वास का सूचक है


ॐ विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।

पात्र त्वात् धन माप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥


विद्या से विनम्रता आती है, विनम्रता से योग्यता, योग्यता से धन, धन से जब अच्छे कार्य करते है, सच्चा सुख मिलता है।


शिक्षा वह बीज है, जो व्यक्ति में समझ के भाव को अंकुरित कर उसके जीवन को निखारती है।

अद्भुत सोच, गहरे विचार और जब आपकी मेहनत मिलती है, तो आपके जीवन में नया और अच्छा परिवर्तन लाती है।


इसलिए कहते है, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥  विद्या धन सबसे बड़ा धन है।


 
 
 

टिप्पणियां

5 स्टार में से 0 रेटिंग दी गई।
अभी तक कोई रेटिंग नहीं

रेटिंग जोड़ें

नमो नमः

एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं

  • YouTube
  • Facebook
  • Whatsapp
  • Instagram
  • Twitter
  • LinkedIn

© 2025 संस्कृत का उदय

bottom of page