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भोगने में सुख कहां है। जो सोचने में सुख होता है।
जिसे तुम देख रहे हो। वो किसी और को देख रहा है। और जो उसे भोग रहा है। वो भी किसी और को देख रहा है। भोगते-भोगते जीवन बीत है। पर सुख नहीं है। भोगने में सुख कहां है। जो सोचने में सुख होता है। वो भोगने में नही होता। और भोगते-भोगते पूरा जीवन निकल जाता है। फिर भी सुख नहीं मिलता। सुख तो स्वयं के अंदर है। ईश्वर के गुणगान में। और वो सुख स्वयं के अंदर की अनुभूति है। सुख की अति से भी व्यक्ति बोर हो जाता है। अंतोगत्वा सुख क्षणिक है। भोगने में सुख कहां है। जो सोचने में सुख होता है। #s

संस्कृत का उदय
26 जून1 मिनट पठन
“श्लोकसंस्कृत्या विद्यालयस्य विकासः” नीलकण्ठः भव: – ज्ञानस्य प्रकाशेन विजयस्व। एक नीलम बनो – ज्ञान के प्रकाश से विजय प्राप्त करो।
नीलकण्ठः भव: – ज्ञानस्य प्रकाशेन विजयस्व। एक नीलम बनो – ज्ञान के प्रकाश से विजय प्राप्त करो। प्रधानाचार्य कक्ष (Principal Room) श्लोक: विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वात् धनमाप्नोति, धनात् धर्मं ततः सुखम्॥ अर्थ: विद्या विनम्रता देती है, विनम्रता से योग्यता आती है, योग्यता से धन और धन से धर्म तथा सुख की प्राप्ति होती है। श्लोक:विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्। अर्थ: विद्या का धन सभी धनों में श्रेष्ठ होता है। वैकल्पिक: न च विद्यासमो बन्धुः। अर्थ: विद्या जैसा कोई

संस्कृत का उदय
23 अप्रैल2 मिनट पठन


संस्कृत शिक्षा — एक सरल मार्गदर्शिका
संस्कृत शिक्षा — एक सरल मार्गदर्शिका अनुक्रमणिका (Complete Index) (अध्याय 1–15 के अनुसार) प्रस्तावना भाग – 1 : प्रारम्भिक शिक्षा अध्याय 1 : संस्कृत भाषा का प्रथम परिचय नमस्कार-रूप मम नाम… भवतः नाम किम्? सरल वाक्य पुल्लिङ्ग/स्त्रीलिङ्ग शब्द अध्याय 2 : शब्द-परिचय एवं सरल वाक्य सः / सा / तत् / एषः / एषा / एतत् नाम–वस्तु पहचान लघु संवाद अध्याय 3 : वस्तु-परिचय पुस्तकम्, फलम्, लेखनी एतत् — तत् प्रयोग वाक्य निर्माण अध्याय 4 : प्रश्नोत्तर एवं सुभाषितम् कुत्र? कदा? कस्य? युतकम् कुत्र

संस्कृत का उदय
23 जन॰7 मिनट पठन


पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं: उनमें छिपा विज्ञान
पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं हैं: उनमें छिपा विज्ञान शोध–प्रस्ताव (Research Proposal) शोध शीर्षक पुराण साहित्य में विज्ञान (एक अनुसन्धानात्मक एवं समीक्षात्मक अध्ययन) 1. शोध समस्या का कथन (Statement of the Research Problem) भारतीय ज्ञान–परंपरा में पुराण साहित्य को सामान्यतः धार्मिक कथाओं एवं पौराणिक आख्यानों का संकलन मान लिया गया है। परिणामस्वरूप पुराणों में निहित वैज्ञानिक, तकनीकी तथा व्यावहारिक ज्ञान की उपेक्षा होती रही है। जबकि वस्तुतः पुराण साहित्य में आयुर्वेद, पशु विज

संस्कृत का उदय
23 जन॰2 मिनट पठन


पुराण – Puran
पुराण — Puran 1.पुराणपरिचयः पुराणों का परिचय और महत्व। पुराणों के प्रकार, उप-पुराण, परंपरागत ज्ञान एवं परंपरा। 2. पुराणिक्षणम् (Purāṇakṣaṇaṃ) पुराणों की शिक्षा का आधार। पुराणों में वर्णित संस्कृति, धर्म और जीवन मूल्यों का अध्ययन। पुराण विषय – पुराण : परिभाषा श्लोक सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च। वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम्॥ अर्थ (हिंदी): जिस ग्रंथ में सर्ग, प्रतिसर्ग, वंश, मन्वंतर और वंशानुचरित — ये पाँच लक्षण हों, वह पुराण कहलाता है। पुराणों के पंचलक्षण स

संस्कृत का उदय
19 जन॰1 मिनट पठन
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