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गुरु शिष्य परंपरा


परंपराया: समर्थनं कुरु, विनाशं वारयितुम् ।।

।। परंपरा को बढ़ावा दें, पतन को रोकें।।


गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः ।

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥


भारतीय संस्कृति में अनेक परंपरा है, और उसमें एक परंपरा गुरु शिष्य परंपरा भी है। 

हर किसी के जीवन में गुरु का होना अति आवश्यक होता है। गुरु का आशीर्वाद प्राप्त होना और हर पथ पर वो हमारा मार्गदर्शन करते रहते है। 

ये बड़े सौभाग्य से प्राप्त होता है।






#धोती_कुर्ता_आपकी_वेशभूषा_आपका_गौरव_है

#समय_अवश्य_बदलेगा_भारत_पुन:_विश्वगुरु_बनेगा 

#जननी_और_जन्मभूमि_स्वर्ग_से_भी_बढ़कर_है

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नमो नमः

एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं

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