आपका कान – एक गर्भ: है।
- संस्कृत का उदय
- 2 फ़र॰
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जो सुनते हैं, वही बनते है, और फिर वही जन्मते है

हम जो सुनते हैं, वह केवल ध्वनि नहीं होती; वह हमारे विचारों, भावनाओं और अंततः हमारे जीवन की वास्तविकता को आकार देती है। हमारे कान एक गर्भ की भांति हैं—जो शब्द, ध्वनियाँ, और विचार इसमें प्रवेश करती हैं, वे हमारी मानसिकता में विकसित होती हैं और अंततः हमारे व्यक्तित्व एवं जीवन का अभिन्न अंग बन जाती हैं।
वेदों की दृष्टि से श्रवण का महत्त्व
वेदों को श्रुति कहते है, श्रुति का अर्थ सुनना और शास्त्र कहते है, शब्द ब्रह्म है। जो आदि से अनादि तक अपने उसी स्वरूप में स्थापति रहेगा। ईश्वर की शक्ति और शब्द से ब्रह्मांड की उत्पति हुई।
दर्शन में कहां जाता है, शब्द ही आप्त है। जो सर्वदा आकाश में विचरण करता है।
सत्य को जानने के लिए मुख्य रूप से प्रमाण, अनुमान और शब्द(आप्त) के द्वारा आप जानते है। जिसमें शब्द मुख्य है।
संस्कृत और वेदों में श्रवण (सुनने) की अत्यधिक महिमा बताई गई है। 'श्रुति' का अर्थ ही है—जो सुना जाए। भारतीय ज्ञान परंपरा में श्रवण, मनन और निदिध्यासन को आत्मज्ञान प्राप्ति के तीन महत्वपूर्ण चरण बताया गया है।
संस्कृत में एक श्लोक है:
"तव कर्णः गर्भः अस्ति। यत् शृणोषि, तत् अन्ते भवतः वास्तविकतायां जायते।"
(अर्थात: तुम्हारा कान एक गर्भ के समान है। जो तुम सुनते हो, वह अंततः तुम्हारी वास्तविकता में जन्म लेता है।)
हम जो सुनते हैं, वही बनते हैं
अच्छे विचार, मंत्र और ज्ञान की बातें सुनने से हमारा मानसिक और आध्यात्मिक विकास होता है।
सावधान रहें, क्या सुनते हैं!
शोर, गपशप और नकारात्मक विचारों से बचें।
प्रेरणादायक शब्दों, संगीत और आध्यात्मिक ग्रंथों को सुनने की आदत डालें।
जिन लोगों की बातें आपको प्रेरणा देती हैं, उन्हें ध्यान से सुनें।
"सावधानतया चयनं कुर्वन्तु – किं शृणोषि?"
(सावधानी से चुनें—आप क्या सुनते हैं?)
जिस प्रकार एक माँ अपने गर्भ में पल रहे शिशु के लिए पौष्टिक आहार का चयन करती है, उसी प्रकार हमें अपने कानों के माध्यम से आने वाली ध्वनियों का भी चयन करना चाहिए। क्योंकि जो भी हम सुनते हैं, वही हमारे जीवन की वास्तविकता का आधार बनता है।
मां के कितने उदाहरण है, जिन्होंने गर्भ में ही बालक को और अल्पायु में भी बालक को शब्दों के माध्यम से महान बना दिया।
महाभारत के महान नायिका मदालसा
इसलिए चुनें—ज्ञान, प्रेम और शांति के शब्द।
सच कहां आपने सही सुनने से आपका जीवन भी उत्कर्ष की राह पर चल जाता है।
लोग आज कुछ भी सुन लेते है।
मेरा मानना है, यदि आप कुछ भी सुनते है, तो उसका प्रभाव आपके कार्य में दिखने लगता है।
ये तो बड़ों की बच्चों की बात है।।
शिशु के जन्म लेने से पूर्व जब शिशु की बनने की प्रक्रिया शुरू ही होती है, उस समय वह सबसे ज्यादा सुनकर अपना निर्माण करने लगता है।