आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशीपंचकम्
- संस्कृत का उदय

- 21 दिस॰ 2025
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आदि शंकराचार्य द्वारा रचित काशीपंचकम्
मनोनिवृत्ति: परमोपशान्ति: सा तीर्थवर्या मणिकर्णिका च।
ज्ञानप्रवाहा विमलादिगंगा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।1
यस्यामिदं कल्पितमिन्द्रजालं चराचरं भाति मनोविलासम्।
सच्चित्सुखैका परमात्मरूपा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।2
कोशेषु पञ्चस्वधिराजमाना बुद्धिर्भवानी प्रतिदेहगेहम्।
साक्षी शिव: सर्वगतोSन्तरात्मा सा काशिकाSहं निजबोधरूपा।।3
काश्या हि काशते काशी काशी सर्वप्रकाशिका।
सा काशी विदिता येन तेन प्राप्ता हि काशिका।।4
काशीक्षेत्रं शरीरं त्रिभुवनजननी व्यापिनी ज्ञानगंगा भक्ति: श्रद्धा गयेयं निजगुरुचरणध्यानयोग: प्रयाग:।
विश्वेशोSयं तुरीय: सकलजनमन:साक्षिभूतोSन्तरात्मा देहे सर्वं मदीये यदि वसति पुनस्तीर्थमन्यत्किमस्ति।।5।



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