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आखिर क्या है शिव जी के सूत्रों का जाल?

7 अक्टू॰
2 मिनट पठन

आखिर क्या है शिव जी के सूत्रों का जाल?

नृत्तावसाने नटराजराजो ननाद ढक्कां नवपञ्चवारम्।उद्धर्तुकामः सनकादिसिद्धान् एतद्विमर्शे शिवसूत्रजालम् ॥

नृत्य (ताण्डव) के अवसान (समाप्ति) पर नटराज (शिव) ने सनकादि (सनक, सनंदन,सनातन, सनत कुमार) ऋषियों की सिद्धि और कामना का उद्धार (पूर्ति) के लिये भगवान शिव ने नवपंच (चौदह) बार डमरू बजाया। तब यह  चौदह शिवसूत्रों का ये जाल (वर्णमाला) प्रकट हुयी।"इसी ध्वनियों से व्याकरण का प्रकट हुआ। महर्षि पाणिनि ने इन सूत्रों को देवाधिदेव शिव के आशीर्वाद से प्राप्त किया जो कि पाणिनीय संस्कृत व्याकरण का आधार बना।माहेश्वर सूत्रों की कुल संख्या १४ हैं।१. अइउण्।२. ऋऌक्।३. एओङ्।४. ऐऔच्।५. हयवरट्।६. लण्।७. ञमङणनम्।८. झभञ्।९. घढधष्।१०. जबगडदश्।११. खफछठथचटतव्।१२. कपय्।१३. शषसर्।१४. हल्।


शिव सूत्र का वर्णन

माहेश्वर सूत्रों की व्याख्या के रूप में ‘नन्दिकेश्वरकाशिका’ के २७ पद्य मिलते हैं | इसके रचयिता नन्दिकेश्वर ने अपने इस व्याकरण और दर्शन के ग्रन्थ में शैव अद्वैत दर्शन का वर्णन किया है, माहेश्वर सूत्रों की व्याख्या भी की है। (उपमन्यु ऋषि) ने इस पर 'तत्त्वविमर्शिणी' नामक टीका लिखी है।

माहेश्वर सूत्रों को ‘प्रत्याहार विधायक’ सूत्र भी कहते हैं।प्रत्याहार बनाने की विधि -इन 14 सूत्रों में संस्कृत भाषा के समस्त वर्णों को परिभाषित किया गया है।प्रथम 4 सूत्रों (अइउण् – ऐऔच्) में स्वर वर्णों तथा शेष 10 सूत्र व्यंजन वर्णों की गणना की गयी है।स्वर वर्णों को अच् एवं व्यंजन वर्णों को हल् कहा जाता है।अच् एवं हल् भी प्रत्याहार हैं।प्रत्याहार का अर्थ होता है – संक्षिप्त कथन।अष्टाध्यायी के प्रथम अध्याय के प्रथम पाद के 71वें सूत्र ‘आदिरन्त्येन सहेता’ (१-१-७१) सूत्र द्वारा प्रत्याहार बनाने की विधि का पाणिनि ने बताया है।आदिरन्त्येन सहेता (१-१-७१): (आदिः) आदि वर्ण (अन्त्येन इता) अन्तिम इत् वर्ण (सह) के साथ मिलकर प्रत्याहार बनाता है जो आदि वर्ण एवं इत्संज्ञक अन्तिम वर्ण के पूर्व आए हुए वर्णों का समष्टि रूप में (collectively) ज्ञान कराता है।उदाहरण: अच् = प्रथम माहेश्वर सूत्र ‘अइउण्’ के आदि वर्ण ‘अ’ को चतुर्थ सूत्र ‘ऐऔच्’ के अन्तिम वर्ण ‘च्’ से योग कराने पर अच् प्रत्याहार बनता है।यह अच् प्रत्याहार अपने आदि अक्षर ‘अ’ से लेकर इत्संज्ञक च् के पूर्व आने वाले औ पर्यन्त सभी अक्षरों का बोध कराता है।अतः, अच् = अ इ उ ॠ ॡ ए ऐ ओ औ।इसी तरह हल् प्रत्याहार की सिद्धि ५ वें सूत्र हयवरट् के आदि अक्षर ह को अन्तिम १४ वें सूत्र हल् के अन्तिम अक्षर (या इत् वर्ण) ल् के साथ मिलाने (अनुबन्ध) से होती है।फलतः, हल् = ह य व र, ल, ञ म ङ ण न, झ भ, घ ढ ध, ज ब ग ड द, ख फ छ ठ थ च ट त, क प, श ष स, ह।नमो नमः

एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं।

 
 
 

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