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सरल संस्कृत अभ्यास कक्षा 7. एषः का अर्थ (Eshaha Ka Arth) – Meaning of Eshaha in Sanskrit
संस्कृत भाषा में एषः का अर्थ होता है यह जो सामने है यथार्थ अगर कोई व्यक्ति (पुलिंग) है और वह सामने हो तो आप उसे इस तरह से उच्चारण करेंगे एषः राजेश: = यह राजेश है

संस्कृत का उदय
5 जुल॰1 मिनट पठन


गीता के उपदेश: जीवन के लिए अमूल्य सीख
जीवन की जटिलताओं और चुनौतियों के बीच, हमें अक्सर एक मार्गदर्शक की आवश्यकता होती है जो हमें सही दिशा दिखाए। ऐसी ही एक अमूल्य धरोहर है भगवद गीता, जो न केवल आध्यात्मिक ज्ञान का भंडार है, बल्कि जीवन के हर पहलू में संतुलन और शांति पाने का सूत्र भी प्रदान करती है। मैंने जब गीता के उपदेशों को गहराई से समझा, तो पाया कि ये हमारे दैनिक जीवन के लिए कितने प्रासंगिक और उपयोगी हैं। आइए, इस ब्लॉग में हम गीता के उन उपदेशों को विस्तार से जानें जो हमें जीवन में स्थिरता, साहस और आत्म-ज्ञान की ओ

संस्कृत का उदय
26 जून4 मिनट पठन


संस्कृत कक्षा 1 (सरल संस्कृत अभ्यास)
सरल संस्कृत अभ्यास

संस्कृत का उदय
26 जून3 मिनट पठन
सरल संस्कृत अभ्यास कक्षा 1. Learn Sanskrit – भवतः, भवत्याः (Bhavatah, Bhavatyaha)
भवतः, भवत्याः (Bhavatah, Bhavatyaha)

संस्कृत का उदय
12 जून3 मिनट पठन


संस्कृत सीखने की सबसे सरल विधि, संस्कृत भाषा का सरल अभ्यास, बच्चे हो या बड़े सब बड़ी आसानी से सीख सकते है।
संस्कृत अभ्यास नई शुरुआत सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्॥ संस्कृत कक्षा – प्रथम दिवसः विषय: मूल परिचय, लिंग, सर्वनाम, क्रिया, स्थान, समय, विभक्ति, संख्याएँ 1. परिचय (Introduction) मम नाम उपेन्द्र:। – मेरा नाम उपेन्द्र है। भवतः नाम किम्? – आपका नाम क्या है? (पुरुष के लिए) भवत्याः नाम किम्? – आपका नाम क्या है? (स्त्री के लिए) उदाहरण: पुंलिङ्गः: मम नाम धीरज:। भवतः नाम किम्? स्त्रीलिङ्गः: मम नाम गायत्री। भवत्याः नाम कि

संस्कृत का उदय
3 जून10 मिनट पठन


. वैदिक एवं उपनिषद काल
. वैदिक एवं उपनिषद काल 1. वैदिक एवं उपनिषद काल (सबसे प्राचीन) यह काल भारतीय इतिहास की नींव है। यहाँ राजा केवल योद्धा नहीं, बल्कि ऋषि और दार्शनिक भी थे। राजा का नाम स्रोत मुख्य उपलब्धि/विशेषता राजा मनु (वैवस्वत) ऋग्वेद प्रथम नृपति और मानव सभ्यता के प्रथम व्यवस्थापक (Lawgiver)। राजा सुदास ऋग्वेद 'दशराज्ञ युद्ध' के विजेता। इन्होंने 'ऋत' (ब्रह्मांडीय सत्य) के बल पर 10 राजाओं को हराया। राजा त्रसदस्यु ऋग्वेद इन्हें 'अर्धदेव' कहा गया। इनके नाम से ही दस्यु (शत्रु) कांपते थे। राजा दिव

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7 मई3 मिनट पठन


नाट्यशास्त्र और मानव जीवन मूल्य “The Natyashastra and Human Life Values”
नाट्यशास्त्र और मानव जीवन मूल्य भरतमुनि द्वारा रचित नाट्यशास्त्र भारतीय नाटक, नृत्य, संगीत और अभिनय का सबसे प्राचीन एवं व्यापक ग्रंथ है। इसे “पंचम वेद” कहा जाता है क्योंकि यह सभी वर्गों के लिए समान रूप से उपयोगी है। नाट्यशास्त्र केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानव जीवन मूल्यों (Manav Jeevan Mulya) को समझने, विकसित करने और संतुलित करने का माध्यम है। नाट्य का उद्देश्य भरतमुनि के अनुसार नाट्य का उद्देश्य है: मनोरंजन (Entertainment) लोकमंगल (Welfare of society) नैतिक शिक्षा (Mo

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6 मई2 मिनट पठन


संस्कृत भाषा क्यों ज़रूरी है, संस्कृत भाषा का महत्व
संस्कृत भाषा का महत्व १. संस्कृति और जड़ों से जुड़ाव“संस्कृतं नाम दैवी वागन्वाख्याता महर्षिभिः।”अर्थ: संस्कृत देववाणी है, जिसे महर्षियों ने प्रकट किया। इससे हम अपने वेद, उपनिषद और गीता जैसे ग्रंथों को समझ पाते हैं। २. सभी भाषाओं की जननी“जननी संस्कृतं सर्वभाषाणां मूलकारणम्।”अर्थ: संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है। इससे अन्य भारतीय भाषाएँ सीखना आसान हो जाता है। ३. बुद्धि और स्मरण शक्ति का विकास“विद्या ददाति विनयं, विनयाद् याति पात्रताम्।”अर्थ: विद्या (संस्कृत ज्ञान) से विनम्रता और

संस्कृत का उदय
6 मई1 मिनट पठन
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