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भोगने में सुख कहाँ है?
भोगने में सुख कहाँ है? जिसे तुम देख रहे हो, वह किसी और को देख रहा है। और जिसे तुम भोग रहे हो, वह भी किसी और की ओर देख रहा है। भोगते-भोगते पूरा जीवन बीत जाता है, फिर भी सच्चा सुख नहीं मिलता। भोगने में सुख कहाँ है? जो सुख सोचने, कल्पना करने और प्रतीक्षा करने में मिलता है, वह कई बार भोगने में नहीं मिलता। इच्छाओं के पीछे भागते-भागते मनुष्य अपना पूरा जीवन बिता देता है, लेकिन तृप्ति फिर भी अधूरी रह जाती है। सच्चा सुख तो स्वयं के भीतर है, ईश्वर के गुणगान में है और आत्मा की अनुभूति म

संस्कृत का उदय
6 दिन पहले1 मिनट पठन


योग क्रिया में सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, स्वयं के निकट हो जाना। उसे ही समाधि की प्रथम अवस्था कहते है।
योग क्रिया में सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, स्वयं के निकट हो जाना। उसे ही समाधि की प्रथम अवस्था कहते है। #yogkiya

संस्कृत का उदय
13 नव॰ 20251 मिनट पठन
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