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भारतस्य नीव संस्कृतम् -

एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराए

  सा विद्या या विमुक्तये। 

         विद्या वही जो बंधनों से मुक्ति दिलाए।

 

श्रद्धा ज्ञान देती है, नम्रता मान देती है और योग्यता स्थान देती है। “श्रोतव्यं खलु वृद्धानामिति शास्त्रनिदर्शनम्” वृद्धों की बात सुननी चाहिए ऐसा शास्त्रों का कथन है।

संस्कृत की सूक्तियां हमें विद्या के महत्व और गुणों के बारे में बताती हैं, ये सूक्तियां हमें जीवन में सफलता पाने का मार्गदर्शन करती हैं.ये सूक्तियां हमें समाज और राष्ट्र के विकास के लिए विद्या के महत्व को समझने में मदद करती हैं। हमें विद्या को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए। संस्कृत में सूक्तियों का उतना ही योगदान है, जितना किसी साहित्य में उसके शब्दों का।लेकिन ये सूक्तियां हमें केवल यथार्थ बताती है,  सूक्ति हमें मानवता से प्रेम करना सिखाती है। जो संस्कृत छात्रों के अतिरिक्त सामान्य संस्कृत जिज्ञासुओं के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

यहाँ हम विश्व की प्राचीनतम भाषा संस्कत की कुछ महत्त्वपूर्ण सूक्तियाँ दे रहे हैं ।

भारतस्य प्रतिष्ठे द्वे संस्कृतं संस्कृतिस्तथा।

​संस्कृति का मूल संस्कृतभाषा है। संस्कृत भाषा ही भारतीय संस्कृति का आदिस्रोत है। संस्कृत भाषा में ही भारत के सांस्कृतिक विचार, उच्चादर्श, नैतिक मूल्य समाहित हैं।

 

 

1. सत्यं वद धर्मं चर।

अर्थ: तुम हमेशा सत्य वचन ही बोलो, हमेशा धर्म के अनुसार ही आचरण करों।

Meaning: You should always speak the truth and always behave according to the religion.

 

2. साहित्य- संगीत- कलाविहीन: साक्षातपशु: पुच्छविषाणहीन:।

अर्थ:  साहित्य, संगीत और कला से रहित व्यक्ति, पूंछ और सींगो से हीन साक्षात पशु होता हैं।

Meaning:  A person devoid of literature, music and art is like an animal without tail and horns.

 

3. नहि सत्यात् परं धनम् ।

अर्थ: सर्वप्रथम धन सत्य ही हैं, इस संसार में सत्य से श्रेष्ठ कुछ भी नहीं हैं, अतः हमे हमेशा सत्य का ही पालन करना चाहिए।

Meaning: The first wealth is truth, there is nothing better than truth in this world, hence we should always follow the truth.

 

4. हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः।

अर्थ: अच्छे और आकर्षक शब्द दुर्लभ हैं।

Meaning: Meaningful pleasant words are rare.

 

5. कीर्तिः यस्य सः जीवति।

अर्थ: जिसके पास प्रसिद्धि है, वह जीवित रहता है।

 Meaning: He who has fame lives.

 

6.संघे शक्तिः कलौ युगे।

अर्थ: कलियुग में संघ की शक्ति।

Meaning: The power of the Sangha in Kali Yuga.

 

7. संतोष परम् सुखम् ।

अर्थ:  सबसे श्रेष्ठ सुख संतोष सुख ही हैं।

Meaning: The best happiness is satisfaction happiness.

 

8. शरीरमाध्यम खलु धर्मसाधनम्।

 अर्थ-शरीर धर्म का साधन है।

Meaning: The body is the means of religion.

 

9. जलदुरूपयोग: महत्पापम् ।

अर्थ: जल ही जीवन हैं, इसलिए जल का दुरूपयोग करना महापाप ही हैं।

Meaning: Water is life, therefore misuse of water is a great sin.

 

10. अमृतमेव गवां क्षीरम्।

अर्थ: गायों का दूध अमृत के समान हैं, गाय का दूध बहुत से गुणों से युक्त और स्वास्थ्यवर्धक होता हैं।

 Meaning: Cow's milk is like nectar, cow's milk has many properties and is healthy.

 

11. उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।

अर्थ: उदार चरित्र वाले लोग सम्पूर्ण पृथ्वी को अपने परिवार के समान मानते हैं।

Meaning: People with generous character consider the entire earth as their family.

 

12. उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथै:।

अर्थ: काम करने से ही कार्यों की सिद्धि होती हैं, केवल मनोरथ से नहीं।

Meaning: Tasks are accomplished only by doing work, not by mere desire.

 

13. आलस्यं हि मनुष्याणा शरीरस्थो महान रिपु:।

अर्थ: शरीर में स्थित आलस्य ही मनुष्यों का सबसे बड़ा शत्रु हैं।

Meaning: The laziness present in the body is the biggest enemy of humans.

 

14. गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति।

 

अर्थ: गुणों को जानने वालों के लिए ही गुण-गुण होते हैं।

Meaning: Qualities are qualities only for those who know them.

 

15. गुणा सर्वत्र पूज्यते।

अर्थ: गुणों की सभी जगह पूजा होती हैं।

Meaning: Qualities are worshipped everywhere.

 

16. लुब्धस्य प्रणश्यति यश:।

 अर्थ: लोभी की कीर्ति नष्ट हो जाती हैं।

 Meaning: The reputation of a greedy person gets destroyed.

 

17. पुण्ये: यशो लभते।

अर्थ: पुण्यों से ही यश की प्राप्ति होती हैं।

 Meaning: Fame is achieved only through good deeds.

 

18. सन्त: समसज्जनदुर्जनानां वच: श्रुत्वा मधुरसूक्तरसं सर्जन्ति।

 अर्थ: सज्जन और दुर्जनों की समयवाणी को सुनकर संत व्यक्ति मधुर सूक्तियों का सृजन करते हैं।

Meaning: After listening to the words of the good and the bad, saints compose sweet sayings.

 

19. स्त्रियां रोचमानायां सर्वं तद रोचते कुलम्।

अर्थ: स्त्री की सुन्दरता ही परिवार की सुन्दरता हैं।

Meaning: The beauty of a woman is the beauty of the family.

 

20 .मनस्वी कार्यार्थी न गणयति दुःखं न च सुखम्।

अर्थ: मनस्वी और जो अपना काम साधना चाहते है, वे दुःख-सुख को कुछ नहीं गिनते।

Meaning: The intelligent people and those who want to accomplish their work do not consider happiness and sorrow as anything.

 

21. न रत्नमन्विष्यति मृगयते हि तत् ।

 अर्थ: एक रत्न खोजता नहीं है। बल्कि उसे खोजा जाता है।

Meaning: A gem is not sought. It is found.

 

22. प्रियेषु सौभाग्यफला हि चारुता।

अर्थ: प्रिय व्यक्ति को सुंदर लगना सौभाग्य का फल हैं।

Meaning: Finding your loved one beautiful is a result of good fortune.

 

23. पुराणमित्येव न साधु सर्वम्।

 अर्थ: कोई बात पुरानी मात्र होने से सही नहीं होती।

Meaning: Something doesn't become right just because it is old.

 

24. रिक्त: सर्वों भवति हि लघु: पूर्णता गौरवाय। 

अर्थ: रिक्त व्यक्ति लघु होता हैं, पूर्णता गौरव के लिए होती हैं।

Meaning: An empty person is small, completeness is for pride.

 

25. सर्वं सत्ये प्रतिष्ठितम् ।

अर्थ: सब कुछ सत्य पर आधारित है। 

Meaning: Everything is based on truth.

 

26. बहुरत्ना वसुंधरा । 

अर्थ: यह पृथ्वी अनेक रत्नों से युक्त हैं। 

Meaning: This earth is rich in many gems.

 

27. त्यक्तलज्ज: सुखी भवेत्।

अर्थ: लज्जा से दूर रहने वाला व्यक्ति हमेशा सुखी रहता हैं.

Meaning: A person who stays away from shyness is always happy.

 

28. विभूषणं मौनमपंडितानाम् । 

अर्थ: मूर्खों की चुप्पी उनके लिए आभूषण है।

Meaning: The silence of fools is an ornament for them.

 

29. मूर्खों हि शोभते तावद् यावत् किंचिन्न भाषते।

अर्थ: मूर्ख तभी तक सुशोभित होता है, जब तक कि वह कुछ नहीं बोलता।

Meaning: A fool remains respectable only as long as he does not say anything.

 

30. श्व: कार्यमद्य कुर्वीत पूर्वाह्ने चापराहिणकम् ।

अर्थ: कल के कार्य को आज करे तथा शाम के कार्य को सुबह करें।

Meaning: Do yesterday's work today and do evening's work in the morning.

 

31. सत्यं बुर्यात प्रियं ब्रूयात, न ब्रूयात सत्यमप्रियम्।

अर्थ: सत्य बोलना चाहिए, प्रिय बोलना चाहिए. कभी भी अप्रिय सत्य नहीं बोलना चाहिए।

Meaning: One should speak the truth, one should speak pleasant things. One should never speak unpleasant truth.

 

32. मित्रेण कलहं कृत्वा न कदापि सुखी जन: ।

अर्थ: मित्र के साथ कलह करके कोई व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं हो सकता।

Meaning: A person can never be happy by quarreling with his friends.

 

33.मधुरापि हि मुर्छ्यते विषवृक्षसमाश्रिता वल्ली।

अर्थ: विष के पेड़ पर चढ़ी लता भी मूर्छित करने वाली हो जाती हैं।

Meaning: The vine climbing on a poisonous tree also causes unconsciousness.

 

34. विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्।

अर्थ: विद्याधन सभी धनों में श्रेष्ठ धन हैं।

Meaning: Knowledge is the best wealth among all the wealth.

 

35. विद्याविहीन: पशु:।

अर्थ: विद्या से विहीन व्यक्ति पशु ही होता हैं।

Meaning: A person devoid of education is an animal.

36. वाग्भूषण भूषणम्।

अर्थ: वाणी का भूषण ही सबसे श्रेष्ठ भूषण हैं।

Meaning: The ornament of speech is the best ornament.

 

37. सत्यमेव जयते नानृतम्।

अर्थ: सत्य की ही जीत होती हैं, झूठ की नहीं।

Meaning: Only truth wins, not lies.

 

38. न हि सत्यात् परो धर्म:।

अर्थ: सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं हैं।

Meaning: There is no religion greater than truth.

 

39. तस्मात् प्रियं हि वक्तव्यं वचने का दरिद्रता।

अर्थ: हमेशा प्रिय ही बोलना चाहिए, बोलने में किस बात की गरीबी।

Meaning: One should always speak only what is sweet; why is there any need to be poor in speaking?

 

40. भार्यामित्रं गृहेषु च।

अर्थ: घर में मित्र भार्या होती हैं।

Meaning: There is a friend and wife in the house.

 

41. पात्रत्वात धनमाप्नोति।

अर्थ: योग्यता से ही धन की प्राप्ति होती हैं।

Meaning: Wealth is obtained only through merit.

 

42. भुजंग एव जानाति भुजंग चरणौ सखे ।

अर्थ: सांप के पाँव को सांप ही जानता हैं।

Meaning: Only a snake knows the snake's feet.

 

43. मद्यपा: किं न जल्पन्ति ।

अर्थ: शराबी क्या नहीं बकते।

Meaning: What do drunkards not say?

 

44. व्यवहारेण मित्राणि जायन्ते रिपवस्तथा ।

अर्थ: व्यवहार से ही मित्र और शत्रु बनते हैं।

Meaning: Friends and enemies are made by behavior.

 

45. स्वदेशे पूज्यते राजा विद्वान् सर्वत्र पूज्यते ।

अर्थ: राजा अपने देश में ही पूजा जाता हैं, जबकि विद्वान् सभी जगह पूजा जाता हैं।

Meaning: A king is worshipped only in his own country, whereas a scholar is worshipped everywhere.

 

46. आत्मन: प्रतिकूलानि परेषा न समाचरेत् ।

अर्थ: स्वयं के प्रतिकूल कभी दूसरों के साथ आचरित न करें।

Meaning: Never treat others contrary to yourself.

 

47. परोपकाराय सतां विभूतय: ।

अर्थ: सज्जन परोपकार के लिए ही होते हैं।

Meaning: Gentlemen are there only for charity.

 

48. आज्ञा गुरूणाम अविचारणीया ।

अर्थ: गुरुजनों की आज्ञा बिना विचारे मान लेनी चाहिए।

Meaning: The orders of teachers should be accepted without any hesitation.

 

49. ज्ञानं भार: क्रियां विना । 

अर्थ: क्रिया के बिना ज्ञान भारस्वरूप हैं।

Meaning: Knowledge without action is a burden.

 

50. बुद्धिर्यस्य बलं तस्य, निर्बुद्धेस्तु कुतो बलम्।

अर्थ: जिसके पास बुद्धि है, उसके पास शक्ति है। जिसके पास बुद्धि नहीं है, उसके पास शक्ति नहीं है।

Meaning: He who has wisdom has power. He who does not have wisdom has no power.

 

51. अर्धो घटो घोषमुपैति नूनम् ।

अर्थ: आधा घड़ा आवाज करता हैं।

Meaning: The half pot makes noise.

 

52. महाजनो येन गत: स पन्था: ।

अर्थ: महान लोगों द्वारा अपनाया गया मार्ग ही अच्छा मार्ग है।

Meaning: The path taken by great people is the good path.

 

53. सर्वे गुणा: कांचनमाश्रयन्ति ।

अर्थ: सारे गुण धन को आश्रित करके ही होते हैं।

Meaning: All the qualities are achieved only by depending upon money.

 

54. जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसि ।

अर्थ: माता और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर हैं।

Meaning: Mother and motherland are greater than heaven.

 

55. धर्मो रक्षति रक्षित: ।

अर्थ: धर्म उनकी रक्षा करता है जो उसकी रक्षा करते हैं

 Meaning: Religion protects those who protect it

 

56. यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता: ।

अर्थ: जहाँ नारियो की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं।

Meaning: Where women are worshipped, gods reside there.

 

57. पयः पानं भुजंगाना केवलं विषवर्धनम्।

अर्थ: सापों को दूध पिलाना, जहर बढ़ाना ही हैं।

Meaning: Feeding milk to snakes only increases their poison.

 

58. छिद्रेष्वनर्था: बहुली भवन्ति ।

अर्थ: कई आपदाएँ खाइयों में होती हैं।

Meaning: Many disasters happen in ditches.

 

59. हितं मनोहारि च दुर्लभं वच: ।

अर्थ: हितकारी एवं मनोहारी वचन काफी दुर्लभ हैं।

Meaning: Beneficial and beautiful words are quite rare.

 

60. न निश्चितार्थद विरमन्ति धीरा:।

अर्थ: धैर्यशील व्यक्ति अपने प्रयोजन से दूर नहीं होते।

Meaning: Patient people do not move away from their purpose.

 

61. कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।

अर्थ: कुपुत्र हो सकता हैं, लेकिन कुमाता कहीं पर भी नहीं होती।

Meaning: A son may be bad, but a mother is never bad.

 

62. क्षीणा नरा निष्करुणा भवन्ति ।

अर्थ: कमजोर व्यक्ति ही दयाहीन होते हैं।

Meaning: Only weak people are cruel.

 

63. दुर्बलस्य बलं राजा ।

 अर्थ: दुर्बल का बल राजा होता हैं।

Meaning: The strength of the weak is the king.

 

64. न हि ज्ञानेन सद्रश पवित्रमिह वर्तते।

अर्थ: इस संसार में ज्ञान से बढ़कर पवित्र कुछ भी नहीं है।

 Meaning: There is nothing more sacred than knowledge in this world.

65. सत्संगति: हि कथय किम न करोति पुंसाम्।

अर्थ: सत्संगति से मनुष्यों का क्या काम नहीं हो सकता।

Meaning: What work cannot be done by human beings by following good company?

 

66. भवितव्यता बलवती ।

अर्थ: होनहार बलवान हैं।

Meaning: The promising are strong.

 

67. अक्षरशून्यो हि अन्धो भवति ।

अर्थ: निरक्षर (मूर्ख) अँधा होता हैं।

Meaning: An illiterate (fool) is blind.

 

68. फलं भाग्यानुसारत: । 

अर्थ: फल भाग्य के अनुसार मिलता हैं।

Meaning: The results are according to fate.

 

69. अंगार: शतधौतेन मलिंत्व न मुन्चति ।

अर्थ: कोयला सैंकड़ों बार धोने पर भी मलिनता नहीं छोड़ता।

Meaning: Coal does not leave dirt even after washing hundreds of times.

 

70. अंगीकृत सुकृतिन: परिपालयन्ति ।

 अर्थ: पुण्यात्मा जिस बात को स्वीकार करते है, उसे निभाते हैं।

Meaning: Whatever the virtuous soul accepts, it follows it.

 

71. अजीर्ण हि अमृतं वारि, जीर्ण वारि बलप्रदम ।

अर्थ: अजीर्ण में जल अमृत के समान होता हैं और भोजन के पचने पर बल देता हैं।

Meaning: In indigestion, water is like nectar and helps in digestion of food.

 

72. अज्ञता कस्य नामेह नोपहासायजायते ।

अर्थ: मुर्खता पर किसे हंसी नहीं आती।

Meaning: Who doesn't laugh at stupidity?

 

73. बुद्धि: कर्मानुसारिणी

अर्थ: बुद्धि कर्म के अनुसार होती हैं जैसा कर्म करोगे वैसी ही बुद्धि होगी।

Meaning: Intelligence depends on the actions, as per the actions, so will be the intelligence.

 

74. अनभ्यासे विषं शास्त्रम् ।

अर्थ: अभ्यास न करने पर शास्त्र विष के तुल्य हैं।

Meaning: If not practiced, the scriptures are equivalent to poison.

 

75. अभ्याससारिणी विद्या ।

अर्थ: विद्या अभ्यास से आती हैं।

Meaning: Knowledge comes from practice.

 

76. अर्द्धों घटो घोषमुपैति नूनम् ।

अर्थ: घडा आधा भरा हो तो अवश्य छलकता हैं।

Meaning: If the pot is half full then it will definitely spill.

 

77. अल्पानामपि वस्तूनां संहति: कार्यसाधिका ।

 अर्थ: छोटे लोगों का एकजुट होना भी काम साध लेता हैं।

Meaning: Even small people can complete the work together.

 

78. अविद्याजीवनं शून्यम्।

अर्थ: बिना विद्या के जीवन शून्य हैं।

Meaning: Life without knowledge is void.

 

79. असाधुं साधुना जयेत् ।

अर्थ: असाधु को साधुता दिखलाकर अपने वंश में करें, दुष्ट को सज्जनता से जीते।

 

Meaning: Inculcate the wicked in your family by showing them good deeds, make the wicked win with gentleness.

 

80. आत्मवत् सर्वभूतेषु य: पश्यति स: पण्डितः ।

अर्थ: जो अपनी तरह सब प्राणियों में देखता है, वही पंडित हैं।

 Meaning: The one who sees himself in all beings is a Pandita.

 

81. आत्मन: प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत् ।

अर्थ: जो अपने प्रतिकूल हो, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करें।

 Meaning: Do not behave towards others which is unfavorable to you.

 

82. आहारो हि मनुष्याणां जन्मना सह जायते ।

अर्थ: आहार मनुष्यों के जन्म के साथ ही पैदा हो जाता हैं।

Meaning: Food is created with the birth of humans.

 

83. एको हि दोषों गुणसन्निपाते निमज्जतीदो: किरणेष्विवाक: ।

अर्थ: गुणों के समूह में एक दोष उसी प्रकार छिप जाता है जैसे चन्द्रमा की किरणों में उसका कलंक।

Meaning: A defect in a set of qualities gets hidden just like a blemish in the rays of the moon.

 

84. कर्मणो गहना गति: ।

अर्थ: काम की गति कठिन हैं।

Meaning: The pace of work is difficult.

 

85. प्रतिभातश्च पश्यन्ति सर्वं प्रज्ञावंत: धिया

अर्थ: बुद्धिमान अपनी सूक्ष्मबुद्धि के बल से सब बाते देख लेते हैं।

Meaning: The intelligent see everything with the power of their subtle intelligence.

 

86. कष्टाद्पि कष्टतरं परगृहवास: परानं च ।

अर्थ: कष्ट से भी बड़ा कष्ट दुसरे के घर में निवास करने एवं दूसरे का अन्न खाना हैं।

Meaning: The bigger trouble than suffering is living in someone else's house and eating someone else's food.

 

87. कालस्य कुटिला गति: ।

अर्थ: काल की गति टेडी होती हैं।

Meaning: The speed of time is slow.

 

88. कालो न यातो वयमेव याता: ।

 अर्थ: समय नहीं बीता, हम ही बीत गये।

Meaning: Time has not passed, we have passed.

 

89. कुरूपता शीलतया विराजते कुवस्त्रता शुभ्रतया विराजते ।

अर्थ: कुरूपता सदाचरण से सुशोभित होती हैं, फटा वस्त्र उज्ज्वलता से सुंदर लगता हैं।

Meaning: Ugliness is beautified by good conduct, torn clothes look beautiful with brightness.

 

90. कोऽतिभारः समर्थानां।

अर्थ: समर्थ जनों के लिए क्या अधिक भार हैं।

Meaning: What is the burden for the capable people?

 

91. क्रोध: पापस्य कारणम् ।

 अर्थ: क्रोध पाप का कारण होता हैं।

Meaning: Anger is the cause of sin.

 

92. क्षमा तुल्यं तपो नास्ति ।

अर्थ: क्षमा के बराबर तप नहीं हैं।

Meaning: Penance is not equal to forgiveness.

 

93. क्षारं पिबति पयोधेर्वर्षत्यम्भोधरो मधुरम्बु: ।

अर्थ: बादल समुद्र का खारा पानी पीते हैं पर मीठा पानी बरसाते हैं।

Meaning: Clouds drink salt water from the sea but rain sweet water.

 

94. अहिंसा परमो धर्म: ।

अर्थ: अहिंसा सबसे श्रेष्ठ धर्म हैं।

Meaning: Non-violence is the best religion.

 

95. गतेअपि वयसे ग्राहा विद्या सर्वात्मना बुधै: ।

अर्थ: बूढा हो जाने पर भी विद्या सब भांति उपार्जना करता रहे।

Meaning: Even after growing old, Vidya should continue to acquire knowledge in every possible way.

 

96. गुणा: पूजास्थानं गुणिषु न च लिंग न च वयः ।

अर्थ: गुणियों में गुण ही पूजा का कारण है न कि लिंग या आयु।

Meaning: Among virtuous people, qualities are the reason for worship and not gender or age.

 

97.  अर्धो घटो घोषमुपैति नूनम् ।

अर्थ: आधा घड़ा आवाज करता हैं।

Meaning: The half pot makes noise.

 

98. चक्रवत परिवर्तन्ते दुखानि च सुखानि च ।

अर्थ: सुख और दुःख चक्र के समान परिवर्तनशील हैं।

 Meaning: Happiness and sorrow are as changeable as the wheel.

 

99. नहि दुष्करमस्तीहं किंचिदध्यवसार्यिनाम ।

अर्थ: प्रयत्न करने वाले के लिए कोई बात दुष्कर नहीं हैं।

Meaning: Nothing is difficult for one who tries.

 

100. चौरे गते न किंमु सावधानम?

अर्थ: चोर जब चोरी कर चले गये तो फिर सावधानी से क्या?

Meaning: When the thieves have stolen and gone away, then what about caution?

 101. जपतो नास्ति पातकम ।

अर्थ: जप करते हुए को पाप नहीं लगता।

Meaning: One does not feel sin while chanting.

 

102. जातस्य हि धुर्वो मृत्यु: ।

अर्थ: जो पैदा हुआ हैं अवश्य मरेगा।

Meaning: Whoever is born will definitely die.

103. न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धा: ।

अर्थ: वह सभा नहीं जहाँ वृद्धजन न हो।

Meaning: Not a meeting where elders are not present.

 

104. जीवो जीवस्य भोजनम् ।

अर्थ: जीव, जीव का भोजन हैं।

Meaning: Living beings are the food of living beings.

 

105. नास्तिको धर्मनिंदक:।

अर्थ: धर्म की निंदा करने वाला नास्तिक होता हैं।

Meaning: One who criticizes religion is an atheist.

 

106. संसर्गजा: दोषगुणा: भवन्ति ।

अर्थ: संसर्ग से ही दोष और गुण उत्पन्न होते हैं।

Meaning: Faults and virtues arise from contact only.

 

107. क्रोधो हि शत्रु: प्रथमो नराणाम् ।

 अर्थ: मनुष्यों का प्रथम शत्रु क्रोध ही हैं।

Meaning: The first enemy of humans is anger.

 

108. तस्करस्य कुतो धर्म: ।

अर्थ: चोर का धर्म क्या?

Meaning: What is the religion of a thief?

 109. तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णा: ।

अर्थ: तृष्णा बूढी नहीं होती, हम ही बूढ़े होते हैं।

Meaning: Desire does not grow old, it is we who grow old.

 

110. परोपकार: पुण्याय पापाय परपीड़नम् ।

अर्थ: परोपकार पुण्य तथा परपीड़न पाप देने वाला होता हैं।

Meaning: By giving charity one attains virtue and by harassing others one attains sin.

 

111. दंतभंगो हि नागानां श्लाघ्यो गिरिविदारणे ।

अर्थ: पहाड़ के तोड़ने में हाथी के दांत का टूट जाना भी तारीफ़ की बात हैं।

Meaning: The breaking of an elephant's tusk while breaking a mountain is also a matter of praise.

 

112. दरिद्रता धीरतया विराज्रते ।

 अर्थ: दरिद्रता धीरता से शोभित होती हैं।

 Meaning: Poverty is adorned with patience.

 

113. दुष्टजनं दूरतः प्रणमेत ।

अर्थ: दुष्ट आदमी को दूर से ही प्रणाम करना चाहिए।

Meaning: An evil person should be greeted from a distance.

 

114. दैवस्य विचित्रा गति: ।

अर्थ: भाग की गति विचित्र हैं।

Meaning: The movement of the parts is strange.

 

115. संपतौ च विपतौ च महतामेकरूपता ।

अर्थ: महान लोग समृद्धि और विपत्ति दोनों में एक समान बने रहते हैं।

Meaning: Great people remain the same in both prosperity and adversity

 

116. परोपकारार्थमिदं शरीरम ।

 

अर्थ: यह शरीर दूसरे के उपकार के लिए हैं।

Meaning: This body is for the benefit of others.

 

117.न स क्रोधसमो रिपु: ।

अर्थ: क्रोध के समान शत्रु नहीं हैं।

Meaning: There is no enemy like anger.

 

118. न च धर्मों दयापर ।

अर्थ: दया से बढ़कर धर्म नहीं।

 Meaning: There is no religion greater than kindness.

 

119. न च विद्यासमो बन्धु: ।

अर्थ: विद्या के समान बन्धु नहीं।

Meaning: Not a friend like Vidya.

 

120. न च ज्ञानात परं चक्षु: ।

अर्थ: ज्ञान से बढ़कर कोई नेत्र नहीं हैं।

Meaning: There is no eye greater than knowledge.

 

121. न ज्ञानेन विना मोक्षं ।

 अर्थ: ज्ञान के बिना मोक्ष नहीं।

Meaning: There is no salvation without knowledge.

 

122. न धर्मात परं मित्रम् ।

अर्थ: धर्म के समान मित्र नहीं।

Meaning: Not a friend like religion.

 

123. नीचैर्गच्छतयुपरि च दशा चक्रनेमिक्रमेण ।

अर्थ: मनुष्य के जीवन की दशा वैसी ही ऊँची नीची हुआ करती है जैसा रथ का पहिया कभी ऊँचा कभी नीचा होता रहता हैं।

Meaning: The condition of human life goes up and down in the same way as the wheel of a chariot goes up and down sometimes.

 

124. परदु: खेनापि दुखिता: विरला:। 

अर्थ: जो दूसरे के दुःख से दुखी होते है ऐसे विरले ही होते हैं।

 Meaning: Those who are saddened by the sorrow of others are rare.

 

125. परोपकाराय सतां विभूतय:।

अर्थ: सज्जनों की सम्पति परोपकार के लिए हैं।

Meaning: The property of gentlemen is for charity.

 

 

  हमारी इस दिव्य यात्रा में आपका स्वागत है!

सा विद्या या विमुक्तये।

विद्या वही जो बंधनों से मुक्ति दिलाए।

 "संस्कृत" भारतीय संस्कृति की आत्मा,

जयतु संस्कृतं जयतु भारतम्

          एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं। 

संस्कृत का पुनर्जागरण ही मानवता का उत्थान है। 

संस्कृत भारत भूमि की प्राणभूत व सारभूत भाषा है।
संस्कृत के बिना भारत की भव्यता, यहां संस्कृति,नीतिमूल्यों, जीव का सर्वश्रेष्ठ मार्ग, ईश्वर तत्व और स्वयं को समझ पाना संभव नहीं ।

नमो नमः

एक भारत, नेक भारत, अनेक परंपराएं

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